साहित्य की जगह ले ली अचार, चटनी की रेसिपी ने 'नीरव'

 महिला रचनाकारों को समर्पित रहा मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन का 25वां 'कथा संवाद' 


गाजियाबाद। मीडिया 36 लिट्रेरी फाउंडेशन द्वारा आयोजित "कथा संवाद" को संबोधित करते हुए प्रख्यात लेखक सुभाष नीरव ने कहा कि ऐसी कार्यशाला ही लेखक गढ़ने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि वे लोग बधाई के पात्र हैं जिन्होंने साहित्य से लौ लगाई है और इस कार्यशाला में निरंतर हिस्सेदारी कर रहे हैं। श्री नीरव ने कहा कि हम ऐसे कठिन समय से गुजर रहे हैं जहां साहित्य को परिदृश्य से धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले रचनाकार भाषा, शिल्प और शैली के स्तर पर कमजोर हो सकते हैं लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि गुलेरी, अज्ञेय, राजेंद्र राव, से. रा. यात्री जैसे लेखक भी यहीं से निकलेंगे।
  मुख्य अतिथि श्री नीरव ने कहा कि अधिकांश साहित्यिक पत्रिकाएं बंद हो चुकी हैं। हिंदी की जो पत्रिकाएं बची भी हैं उनमें साहित्यिक पृष्ठों की जगह अचार, मुरब्बा की रेसिपी या फिल्मी नायिकाओं की तस्वीरें छपी मिलती हैं। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. नवीन लोहनी ने "कथा संवाद" के तीसरे वर्ष में प्रवेश को एक सुखद संकेत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का विस्तार विश्व विद्यालय स्तर पर होना चाहिए। 30 माह के अपने चीन प्रवास के अनुभव साझा करते हुए डॉ. लोहनी ने कहा कि देश में प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चों को हिंदी पढ़ाने के प्रति उदासीनता बरती जा रही है, जबकि चीन के 17 विश्व विद्यालयों में हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल है। वर्ष 2020 तक चीन के 20 विश्व विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाने लगेगी। इससे पूर्व अपने संबोधन में आयोजक सुभाष चंदर ने कहा कि अन्य महानगरों की तरह गाजियाबाद में कविता व गजल के कार्यक्रम तो बहुतायत में हो रहे हैं, लेकिन कहानी विधा पर होने वाला "कथा संवाद" इकलौता कार्यक्रम है। संयोजक आलोक यात्री ने कहा कि फाउंडेशन की कोशिश किस्सागोई की परंपरा को जीवित रखना है। फाउंडेशन के अध्यक्ष शिवराज सिंह ने अपनी रचना "हम सब चोर हैं" का खाका (ड्राफ्ट) सुनाया। मनु लक्ष्मी मिश्रा की कहानी "रेप" पर विस्तृत चर्चा हुई। एक स्वर से इस कथा को सशक्त रचना घोषित किया गया। प्रीति कौशिक की कहानी "डर", डॉ. बीना शर्मा की कहानी "रिश्ता" और नेहा वैद की कहानी "हिचकू" पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बीना शर्मा ने किया। संवाद में डॉ. धनंजय सिंह, गोविंद गुलशन, सुशील शर्मा, अंजू जैन, रवि अरोड़ा, अनामी शरण बब्बल, दिनेश श्रीवास्तव ने भी विचार प्रकट किए। इस अवसर पर कुलदीप, अशोक कौशिक, सुदामा पाल, रश्मि पाठक, तेजस चौहान, पराग कौशिक, योगेंद्र सिंह, अजय चौहान, वागीश शर्मा, रवि शंकर पाण्डेय, भारत भूषण बरारा, दिनेश दत्त पाठक, विनीत गौड़, सुरेंद्र शर्मा, अभिषेक कौशिक सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद थे।