मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म "आचार्य मधुकर"

जरारा : आत्मा और प्रमात्मा दोनों मे ही ईश्वर का ही वास है। इसको जिस मनुष्य ने जान लिया वह मानव महान है। विपति काल में धर्म की परीक्षा होती है। लाख विपत आए जाए मनुष्य को कभी धर्म का मार्ग नही छोड़ना चाहिए। मानव अगर मानव की सेवा करता है। वह भी एक धर्म के समान ही है। हनुमान ने एक सेवक के साथ साथ मित्र की भूमिका निभाई। यह बातें सीतापुर से पधारे रामकथा वाचक मधुकर भैयाजी ने मंगलवार को क्षेत्र के गांव मीरपुर(जरारा) में चल रही रामकथा के अंतिम दिन कही। कथायज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालूओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आचार्य ने कथा के दौरान राम  बनवास, सवरी से मिलन, सबरी के जूठे बेर के मुखपान, सीता हरण, सुग्रीव से मिलन बाद रावण का वध व विभिषण के राज्याभिषेक के बाद माता सीता के साथ अयोध्या वापसी आदि प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा भाव के विना भगवान नही मिलते। रामचरित्र मानस में राम और सीता का व्यवहार हमारे और समाज के लिए एक आदर्श है। प्रवचन के दौरान बीच-बीच में भजन व कीर्तन से लोग भक्ति की सागर में गोता लगाते रहे। कथा समापन पर गांव में आस -पास के सैकड़ों लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर ज्वाला प्रसाद,रिषपाल सिंह, अमर सिंह, श्रीप्रकाश सिंह, चंद्रभान शर्मा, नेपाल सिंह राघव, फतह सिंह रघुवंशी, मनोरमा, हरवीर, जयवीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, सुनील, रामौतार सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।