साहब! कलेक्टर हों तो ऐसे, जिनमें अफसरी कम मानवीय पहलू ज्यादा...ऐसे निपटा रहे परेशानियां
 



एक अथक योद्धा की तरह दिन रात काम कर रहे जिलाधिकारी
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आजमगढ़। एक अथक योद्धा की तरह जिलाधिकारी एन पी सिंह कोरोना जैसी महामारी से निपटने में लगे हैं। आजमगढ़ के नागरिकों को किसी तरह की तकलीफ न हो इसके लिये एक अधिकारी से बढ़कर जो भी हो सकता है वो करने के लिये तत्पर हैं। मंगलवार को उन्होने जनपद के मुख्य चौक पर पहुंच गये और फिर अपने अंदाज में उन्होने लोगों का हौसला बढ़ाया। संतेरे केले के भाव पूछे, किराना वालों का हाल जाना। हर एक बारीक चीज पर जिलाधिकारी की पैनी निगाह यह कहने को मजबूर कर रही है कि साहब! कलेक्टर हों तो ऐसे....।
जिलाधिकारी आजमगढ़ एन पी सिंह मंगलवार की सुबह 8 बजे चौक पर निरीक्षण करने पहुंच गये। जिलाधिकारी द्वारा दुकानदार से विभिन्न सामानों के मूल्य के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने न केवल हौसला बढ़ाया, वरना यह तय करने को कहा कि सुरक्षा के मानकों से समझौता न हो तथा कालाबाजारी किसी भी कीमत पर नही होनी चाहिये। इसके साथ उन्होंने फल के दुकानदार से संतरे और केले के भाव पूछे जिलाधिकारी ने लॉक डाउन लगे सुरक्षाकर्मियों को पूरी कठोरता के साथ पालन करने का निर्देश दिए। 


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जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा कोरोना वायरस की रोकथाम हेतु जनपद में जनता से अपील की गयी कि अनावश्यक घरों से बाहर न निकलें। जिलाधिकारी ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कमी नही है। जिलाधिकारी ने इस कार्य में लगे चिकित्साधिकारी, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी एवं मीडिया बन्धुओं की प्रशंसा की है कि इस संवेदनशील घड़ी में आप जिस दृढ़ता और धैर्यता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहें हैं, उसके लिए जिला प्रशासन आभारी है। 
उल्लेखनीय है कि जनता कर्फ्यू लॉक डाउन के पहले दिन जनपद में आवश्यक वस्तुओं के दाम बेताहाशा बढ़ने लगे थे। अपने कौशल से जिलाधिकारी ने एक दिन में इस समस्या से पार पा लिया। अब जनपद में जहां सभी सामान सामान्य मूल्य पर मिल रहे हैं, वहीं किसी भी वस्तु की कमी नही है। जिलाधिकारी के प्रयासों से राहत पाये लोग यह कहने से नही चूकते कि साहब! कलेक्टर हों तो ऐसे जिनमें अफसरी कम मानवीय पहलू ज्यादा है।


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