जानिए क्रोध ( गुस्से) आने के कुछ ज्योतिषीय कारण

 गुस्से का सम्बन्ध कुंडली के प्रथम भाव से अधिक है।। अगर कुंडली के प्रथम भाव मे समस्या हो तो व्यक्ति गुस्सेल होगा. उदाहरण के लिए नीच का शनि , ख़राब राहू या केतु व्यक्ति को जिद्दी और गुस्सेल बना देता है।।


इसके अलावा जब –जब नकारात्मक ग्रह महादशा, अन्तर्दशा मे आते है तो भी व्यक्ति कुछ समय के लिए गुस्सेल हो जाता है.
परन्तु इसे कन्ट्रोल करना चाहिए।।


ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो क्रोध के मुख्य कारण मंगल, सूर्य, शनि, राहु तथा चंद्रमा होते हैं।


इनमें से यदि मंगल ग्रह सूर्य (पहचान और सहनशक्ति) और चंद्रमा (शारीरिक और भावनात्मक जरूरत) के समान व्यवहार कर सकता है, यदि जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह से संबंधित हो तो क्रोध व्यक्त करने में कामयाब हो जाता है।


सामान्य तौर पर एक छोटा लक्षण भी लंबे समय के क्रोध के लिए काफी होता है। क्रोध, आलोचना और बौद्धिक/ सामाजिक श्रेष्ठता की भावना की ओर ले जाता है।


अभिव्यक्ति ज्ञान के साथ संतुलित होती है।


मंगल ग्रह का शनि से युति गुस्से को नियंत्रित करने में असमर्थ होती है। यह अत्यधिक विघटन का भाव पैदा कर सकते हैं।
जिन व्यक्तियों का मंगल अच्छा नहीं होता है, उनमें क्रोध और आवेश की अधिकता रहती है। ऐसे व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी उबल पड़ते हैं।


अन्य व्यक्तियों द्वारा समझाने का प्रयास भी ऐसे व्यक्तियों के क्रोध के आगे बेकार हो जाता है। क्रोध और आवेश के कारण ऐसे लोगों का खून एकदम गर्म हो जाता है। लहू की गति (रक्तचाप) के अनुसार क्रोध का प्रभाव भी घटता-बढ़ता रहता है।


राहू के कारण जातक अपने आर्थिक वादे पूर्ण नहीं कर पाता है। इस कारण भी वह तनाव और मानसिक संत्रास का शिकार हो जाता है।


ज्योतिष के अनुसार, क्रोध अग्नि तत्व द्वारा द्योतक है। अग्नि तत्व के साथ संबंधित ग्रहों और राशियों के नकारात्मक या विपरीत होने से संबंधित व्यक्ति प्रतिकूल ग्रहों की अवधि के दौरान, अत्यधिक क्रोध करता है।


मंगल के साथ नीच चंद्रमा घरेलु शांति के लिए शुभ नहीं है. दूसरे घर (तीसरे और छठे घर के स्वामी) और मंगल / शनि के कारण जातक का स्वभाव अपने कैरियर में गंभीर समस्याओं का सामना कराता है।


वे सभी जातक जिनकी कुंडली मे मंगल राहु और शनि ज़्यादा प्रभावित होते है वो लोग ज़्यादा झगड़ा करते है ।
यदि मंगल के साथ राहु होगा तो ज़्यादा झगड़ा करते है  ।
यदि कुंडली में शनि कमज़ोर होगा तो भी झगड़ा करते है  ।
राहु शरीर मे गर्मी बढ़ाता है ।


यदि चंद्रमा लग्र में या तीसरे स्थान में मंगल, शनि या केतु के साथ युत हो तो क्रोध के साथ चिडचिडापन देता है। वहीं यदि सूर्य मंगल के साथ योग बनाये तो अहंकार के साथ क्रोध का भाव आता है।


मंगल शनि की युति क्रोध जिद के रूप में व्यक्त होती है। राहु के लग्र, तीसरे अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बडा मानकर अंहकारी बनाता है जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है।


ध्यान रखें—जिस बच्चे का माथा ज़्यादा बड़ा होगा या ज़्यादा ही छोटा होगा तो भी झगड़ा करते है  ।
उन्हें B.P. की प्राब्लम हो जाती है  ।
उन बच्चों को नींद मे डर लगता है  ।


**** क्रोध (गुस्से) से होने वाली हानियाँ (नुकसान)—


**** यदि कोई व्यक्ति लगातार गुस्सा करता है तो उसे सर दर्द की शिकायत हो सकती है क्यूंकि गुस्सा करने से सर मे ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है।।
****ये क्रोध व्यक्ति को अवसादग्रस्त भी कर सकता है।।
**** क्रोध करने वालों को हाई ब्लड प्रेशर की बिमारी भी हो सकती है ।।
**** क्रोधी लोगों को मधुमेह (डाइबिटीज) होने का खतरा बढ़ जाता है ।।
**** क्रोध करने वालों की फेफड़ो की कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है ।।
**** कुछ लोगो को सांस लेने मे भी समस्या होने लगती है।।
**** क्रोध करने वाले कुछ लोग पाचन तंत्र की समस्या से ग्रस्त हो जाते है ।।
****गुस्सेल लोगो को नींद आने मे भी समस्या होने लगती है.
****गुस्सा आदमी को जुर्म की दुनिया मे भी घुसा देता है.
वास्तव मे देखा जाए तो गुस्से से व्यक्ति खुद को ही सजा देता है. अतः ये जरुरी है की हम अपने क्रोध पर नियंत्रण करे ।।


आप अपनी राशि के आधार पर क्रोध को निम्न उपाय अपनाकर शांत करें :—


मेष : मेष राशी के जातको का प्रधान मंगल होता है. इस राशी के जातको को गुस्सा कम ही आता है किन्तु जब इन्हें गुस्सा आता है तो इनका रूप प्रचंड हो जाता है. इन्हें अपने क्रोध को नियंत्रण में रखने के लिए मंगलवार के दिन व्रत रखना चाहियें. साथ ही हनुमान जी की विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहियें. अगर आप मंगलवार के दिन मीठे पानी का दान करते हो तो ये आपके लिए और भी लाभदायक होता है।।


वृष : वृष राशि वाले जातको को गुस्सा बहुत आता है, इन्हें अपने क्रोध को शांत रखने के लिए अंकुरित हरी मुंग और सौंफ का प्रतिदिन सेवन करना चाहियें, साथ ही इन जातको को भगवान गणेश जी की पूजा करनी चाहियें और उन्हें एक सुपारी अर्पित करनी चाहियें.
मिथुन : मिथुन राशि के जातको को दूध, दही, मक्खन, पनीर इत्यादि सफ़ेद वस्तुओं का अधिक सेवन करना चाहियें. सफ़ेद रंग शांति का प्रतिक होता है और इनका सेवन करने से इनके मन में शांति का वास होता है. इस राशी के जातको को माता दुर्गा जी की पूजा करनी चाहियें।।
कर्क : कर्क राशी के जातको के गुस्से को शांत करने के लिए धुम्रपान करना बिलकुल भी अच्छा नही है और इन्हें जितना जल्दी हो सके इसे बंद कर देना चाहियें. अगर आप इसे बंद करने में असमर्थ है तो आप कम से कम मंगलवार के दिन तो धुम्रपान का सेवन बिलकुल मत करें. इनके स्थान पर आप मीठे सौंफ का सेवन कर सकते हो. साथ ही आप देवी पार्वती जी के पुत्र कार्तिकेय की पूजा करें. आपकी गुस्सा करने की आदत में परिवर्तन आएगा।।


सिंह : सिंह राशि वाले जातको का प्रधान गुरु होता है तो सिंह राशि के जातको को गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं का सेवन करना चाहियें, इन जातको को अपने माथे पर रोज केसर का तिलक लगाना चाहियें, साथ ही आप गर्म चीज़ो का सेवन बिलकुल ना करें क्योकि ये आपके मिजाज को गर्म बनती है. आप विष्णु जी की पूजा और स्तुति करें, आपको लाभ मिलेगा.
कन्या : कन्या राशि के जातको का पंचमेश स्वामी शनि देव होता है तो इन्हें अपने गुस्से को शांत करने के लिए हनुमान चलिसा का पाठ करना चाहियें. साथ ही इन्हें शनिवार के दिन काली वस्तुओं का सेवन करना चाहियें और काले कपडे ही धारण करना चाहियें।।
तुला : इस राशि के जातको को गुस्सा कम ही आता है क्योकि इनकी राशि का स्वामी चंद्र होता है जो शीतलता देने वाला गृह है. फिर भी इन्हें कुछ स्थितियों में गुस्सा आ ही जाता है. इन्हें अपने गुस्से को शांत रखने के लिए चन्दन का तिलक लगाना चाहियें और शिवाष्टक का पाठ करना चाहियें. ऐसा करने से इनकी कभी कभी गुस्सा आने की आदत भी कम हो जाती है.
वृश्चिक : वृश्चिक राशि के जातको को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखने के लिए कच्चे दूध में थोड़ी सी दही और केसर को मिलकर तिलक करना चाहियें. साथ ही इन्हें सरस्वती जी की पूजा करनी चाहियें.
धनु : आपको अपने गुस्से को नियंत्रित करने के लिए सोने से पहले एक बड़े बर्तन में पानी भर कर उसमे सिंधा नमक मिलाना चाहियें और उस पानी में कम से कम 30 मिनट तक अपने पैरो को धोना चाहियें, ऐसे करने से आपकी गुस्सा करने की आदत कम होती है. धनु राशि के जातको को गुस्से को शांत रखने के लिए प्रातः काल के समय भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए, साथ ही इन्हें अधिक मिर्च मसाले से भी चीजों के सेवन से भी बचना चाहियें. इन जातको के लिए कृष्ण जी की पूजा करना लाभदायक होता है.
मकर : मकर राशि के जातको को क्रोध को कम करने के लिए फ़ास्ट फ़ूड का बिलकुल भी सेवन नही करना चाहियें, अपितु इन्हें हरी सब्जी को अपने खाने और आहार में स्थान देना चाहियें. आप हर रोज कत्थे का भी सेवन अवश्य करें. लक्ष्मी जी की पूजा करना आपके गुस्से को कम करने में लाभदायक सिद्ध होता है.
कुम्भ : कुम्भ राशी के जातको को रोज एक हरी इलाइची का सेवन करना चाहियें. साथ ही इन्हें ऐसे खाने से परहेज करना चाहियें जिससे इन्हें बादी हो जैसेकि कद्दू, मैदा, डालडा, उड़द की दाल, छोला और राजमा.
मीन : आपको अपने क्रोध पर काबू पाने के लिए सोमवार के दिन व्रत रखना चाहियें और गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करना चाहियें. आपको खाने में मीठे और नमक का कम सेवन करना चाहियें, साथ ही आप लहसुन और प्याज का भी कम ही सेवन करें।।